पुनर्धनाढ्यः पुनरेव भोगी !! 


सुपात्र दानाच्च भवेध्दनाढ्यो,
धनप्रभावेण करोति पुण्यम !
पुण्यप्रभावात्सुर लोकवासी,
पुनर्धनाढ्यः पुनरेव भोगी !!





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