सन्देश

शत्रोरपि गुणा वाच्या, दोषा वाच्या गुरोरपि |



टिप्पणियाँ

  1. .

    शत्रुओं के भी गुण तथा गुरुओं के भी दोष कह देना योग्य है.

    .

    उत्तर देंहटाएं
  2. छोटी सी सूक्ति में कितनी बडी बात कह दी है
    धन्‍यवाद प्रतुल जी

    इस तरह की सूक्तियाँ आगे भी भेजते रहें ।।

    उत्तर देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

अपने सुझाव, समाधान, प्रश्‍न अथवा टिप्‍पणी pramukh@sanskritjagat.com ईसंकेत पर भेजें ।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गम् (जाना) धातु: - परस्‍मैपदी

अव्यय पदानि ।।

समासस्‍य भेदा: उदाहरणानि परिभाषा: च - Classification of Samas and its examples .

दृश् (पश्य्) (देखना) धातुः – परस्मैपदी

भू (होना) धातु: - परस्‍मैपदी