संस्‍कृतव्‍याकरणम् (समासप्रकरणम्)



बान्‍धवा: अद्य व्‍याकरणकक्ष्‍याया: प्रथमं सोपानं प्रस्‍तूयते अत्र ।  व्‍याकरणकक्ष्‍या: क्रमेण नैव प्रकाशयिष्‍याम: ।  एतेषां प्रस्‍तुतीकरणं केवलं विषयक्रमेण करिष्‍यते ।  यथा यदि पूर्वं सन्धि: प्रस्‍तूयते चेत् सम्‍पूर्णसन्धिप्रकरणस्‍य प्रस्‍तुतीकरणानन्‍तरमेव अन्‍यविषया: उपस्‍थापयेम । 

अद्य व्‍याकरणकक्ष्‍याया: प्रथमसोपाने समासपरिचय: करिष्‍यते ।  समासपरिचयानन्‍तरं तेषां प्रयोगा: शिक्ष्‍यते ।  अनन्‍तरं उदाहराणि प्रकाश्‍यते ।  एतानि सर्वाणि प्रकाश्‍य अनन्‍तरं अग्रिमसोपानं प्रारम्‍भं करिष्‍ये ।

समासा: द्विधा 

1- केवलसमास: ।
2- विशेषसमास: ।

केवलसमास: - तत्‍पुरुषादिसंज्ञाविनिर्मुक्‍त: समाससंज्ञामात्रयुक्‍त: केवलसमास: । 
अर्थात् यस्‍य समासस्‍य नास्ति नाम कश्चित् स: समास: केवलसमास: इति अभिधीयते (ज्ञायते) । 

विशेषसमास: - विशेषसमास: चतुर्धा -


1- अव्‍ययीभाव समास: - प्राय: पूर्वपदार्थप्रधान: अव्‍ययीभाव: । 
         यस्मिन् पूर्वपदस्‍य प्राधान्‍यं भवति स: अव्‍ययीभावसमास: इति अभिधीयते ।  अत्र एक: इतोपि अवधेय: ।  अव्‍ययीभावे प्राय: पूर्वपदम् अव्‍ययमपि भवति एव ।  यथा उपगंगम् ।  अत्र पूर्वपद उप इत्‍यस्‍य प्राधान्‍यमेव ।   पुनश्‍च उप शब्‍द: अव्‍ययम् अपि अस्ति ।  अव्‍ययं किं नाम अव्‍ययं ते शब्‍दा: येषां रूपपरिवर्तनं कदापि न भवति  ।  यथा उप, इति, अथ इत्‍यादया: ।

2- तत्‍पुरुष समास: - प्राय: उत्‍तरपदार्थप्रधान: तत्‍पुरुष: ।
       यस्मिन् शब्‍दे उत्‍तरपदस्‍य प्राधान्‍यं भवति स: तत्‍पुरुष समास: ।  यथा कर्मकुशल: ।  अत्र कुशलपदस्‍य प्राधान्‍यमस्ति अत: अत्र तत्‍पुरुष समास: इति अस्ति ।

3- बहुब्रीहि समास: - प्राय: अन्‍यपदार्थप्रधान: बहुब्रीहि: । 
       यस्मिन् पदे पूर्वोत्‍तरद्वयोरपि प्राधान्‍यं न भवति अपितु कस्‍यचित् अन्‍यस्‍य एव शब्‍दस्‍य प्राधान्‍यं भवति तत्र बहुब्रीहि समास: भवति ।  यथा पीतक्षीर: ।  अत्र निश्‍चयेन तस्मिन् विषये वार्ता चलति य: दुग्‍धं पीतवान् अत: द्वयोरपि दत्‍तशब्‍दयो: प्राधान्‍यं नास्ति अपितु अन्‍यस्‍य प्राधान्‍यं प्राप्‍यते अत: अत्र बहुब्रीहि समास: अस्ति ।

4-द्वन्‍द्व समास: - प्राय: उभयपदार्थप्रधान: द्वन्‍द्व: । 
यत्र उभयशब्‍दयो: प्राधान्‍यं भवति स: समास: द्वन्‍द्व: इति कथ्‍यते ।  यथा - रामकृष्‍णौ ।  अस्मिन् पदे राम: च कृष्‍ण: च इति बोध: भवति ।  अत: अत्र द्वन्‍द्व समास: अस्ति ।

अद्य एतावदेव अलम् ।  अग्रिमलेखे एतेषां चतुर्णां समासानां भेदाना: विषये पठिस्‍याम: । 
तावत् नमो नम: 

सर्वे भवन्‍तु सुखिन: सर्वे सन्‍तु निरामया: 
सर्वे भद्राणि पश्‍यन्‍तु मा कश्चित् दु:खभागभवेत् ।। 

।। संस्‍कृतजगत् ।।

टिप्पणियाँ

  1. main sanskrit m samas k bhed ko lekar confuesd hoon.class-8 m five samas ,class-10 m six, laghu sidhant komudi m to two bhed kar uska upbhed bana diya h.mai net jrf ka exam face karne wali huin plz conform y bata d ki 2,4,5,6 opstion ho to kon sahi hoga.

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    1. अनीता जी

      समास के मूलत: 5 भेद ही होते हैं । आपने समास के जो 6 भेद पढे हैं वो हिन्‍दी व्‍याकरण के अनुसार हैं । संस्‍कृतव्‍याकरण में समास के 5 ही भेद होते हैं, जो उदाहरण सहित यहाँ दिये गये हैं ।
      नेट के पाठ्यक्रम में यही मान्‍य हैं ।

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  2. how to recognize the SAMASTHAPADAM and write its name and VIGRAHA VAAKYA? how can we remember samasas with reasons?
    please give reply.

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  3. Bahubali samas ke practice questions mil sakte hai with answers

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  4. Bahubali samas ke practice questions mil sakte hai with answers

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  5. समास शब्द में कौन सी प्रकृति व प्रत्यय हैं....?

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  6. इसमें भी पांच ही भेद दिए है,एक केवल समास और दूसरा विशेष समास।विशेष समास के ही भेद है जो चार दिए है।केवल समास और 4 अन्य तो कुल मिलाकर 5 भेद हुए।

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    1. उच्चशिक्षा में मात्र 5 समास हैं । किन्तु उ. मा. स्तर तक कुल मिलाकर ६ समास माने जाते हैं ।

      अव्ययीभाव
      तत्पुरुष
      बहुव्रीहि
      द्वन्द्व
      कर्मधारय
      द्विगु

      इनके भेद क्रमशः

      अव्ययीभाव (0)

      तत्पुरुष (6)
      द्वितीया से सप्तमी तक 6 भेद।
      कुछ अन्य भेद भी हैं (उपपद, प्रादि, अलुक, गति, नञ्, मध्यमलोपी, मयूरव्यंसकादि) पर ये उच्च स्तरीय हैं ।

      बहुव्रीहि (2)
      1-समानाधिकरण (द्वितीया से सप्तमी तक 6 भेद)
      2-व्यधिकरण (पहला पद प्रथमा व दूसरा पद षष्ठी या सप्तमी)

      द्वन्द्व (3)
      1- इतरेतर
      2- समाहार
      3- एकशेष

      कर्मधारय (4)
      1- उपमानपूर्वपद
      2- विशेषणपूर्वपद
      3- उपमानोत्तरपद
      4- विशेषणोभयपद
      (माध्यमिक स्तर तक कर्मधारय का कोई भी भेद नहीं पढ़ाया जाता है)

      द्विगु (0)

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  7. उत्तर
    1. पञ्चगङ्गम् में अव्ययीभाव किन्तु पञ्चगवम् में द्विगु है ।

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  8. उत्तर
    1. सविग्रह मतलब समास विच्छेद के साथ ।
      जैसे : राजपुरुष = राज्ञः पुरुषः
      इसमें पहला समस्त पद यानी कि समास है और दूसरा समास विच्छेद । इसे कहेंगे सविग्रह समास प्रस्तुति ।

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  9. उत्तर
    1. हिन्दी में लिखें, शब्द स्पष्ट नहीं हो रहा है ।

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  10. संस्कृत में समास के चार भेद ही होते हैं।
    लघुसिद्धांत कौमुदी के अनुसार (वरदराजचार्य) ।
    1.अव्ययीभाव
    2.तत्पुरुष
    3.बहुब्रीहि
    4.द्वंद्व
    अब तत्पुरुष के आठ भेद/ नौ भेद / ग्यारह भेद किताब लिखता है।
    आठ में /नौ में -
    कर्मधारय, नञ, द्विगु, छ:विभक्ति(प्रथमा को छोड़ दिया जाता है।)
    गयारह में -
    इसके अलावा - प्रादि, उपपद, हैं।

    पुस्तक - पुष्पा दीक्षित
    ISBN : 81-7702-135-4

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    उत्तर
    1. उ.मा. स्तर तक कुल मिलाकर ६ समास माने जाते हैं ।

      अव्ययीभाव
      तत्पुरुष
      बहुव्रीहि
      द्वन्द्व
      कर्मधारय
      द्विगु

      इनके भेद क्रमशः

      अव्ययीभाव (0)

      तत्पुरुष (6)
      द्वितीया से सप्तमी तक 6 भेद।
      कुछ अन्य भेद भी हैं (उपपद, प्रादि, अलुक, गति, नञ्, मध्यमलोपी, मयूरव्यंसकादि) पर ये उच्च स्तरीय हैं ।

      बहुव्रीहि (2)
      1-समानाधिकरण (द्वितीया से सप्तमी तक 6 भेद)
      2-व्यधिकरण (पहला पद प्रथमा व दूसरा पद षष्ठी या सप्तमी)

      द्वन्द्व (3)
      1- इतरेतर
      2- समाहार
      3- एकशेष

      कर्मधारय (4)
      1- उपमानपूर्वपद
      2- विशेषणपूर्वपद
      3- उपमानोत्तरपद
      4- विशेषणोभयपद
      (माध्यमिक स्तर तक कर्मधारय का कोई भी भेद नहीं पढ़ाया जाता है)

      द्विगु (0)

      हटाएं
  11. संस्कृत भाषा में कुल मिलाकर ६ समास और उनके भेद कुल मिलाकर २८ समास समासचक्र में बताए है। इसमें तत्पुरुष समास के ८ भेद, कर्मधारय समास के ७ भेद, बहुव्रीही समास के ७ भेद, द्विगु समास के २ भेद द्वंद्व समास के २ भेद और अव्ययीभाव समास के २ भेद बताए गए है। क्या मुझे आप अव्ययीभाव समास के दोनो भेदों के बारे मे जानकारी दे सकते है???

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    उत्तर
    1. उ.मा. स्तर तक कुल मिलाकर ६ समास माने जाते हैं ।
      अव्ययीभाव
      तत्पुरुष
      बहुव्रीहि
      द्वन्द्व
      कर्मधारय
      द्विगु

      इनके भेद क्रमशः
      अव्ययीभाव (0)

      तत्पुरुष (6)
      द्वितीया से सप्तमी तक 6 भेद।
      कुछ अन्य भेद भी हैं (उपपद, प्रादि, अलुक, गति, नञ्, मध्यमलोपी, मयूरव्यंसकादि) पर ये उच्च स्तरीय हैं ।

      बहुव्रीहि (2)
      1-समानाधिकरण (द्वितीया से सप्तमी तक 6 भेद)
      2-व्यधिकरण (पहला पद प्रथमा व दूसरा पद षष्ठी या सप्तमी)

      द्वन्द्व (3)
      1- इतरेतर
      2- समाहार
      3- एकशेष

      कर्मधारय (4)
      1- उपमानपूर्वपद
      2- विशेषणपूर्वपद
      3- उपमानोत्तरपद
      4- विशेषणोभयपद
      (माध्यमिक स्तर तक कर्मधारय का कोई भी भेद नहीं पढ़ाया जाता है)
      द्विगु (0)

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  12. हरिहरौ का क्या समास विग्रह होगा

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