सुरेशशक्तिवर्धिनी नितान्तकान्तकामिनी
निशाचरेन्द्रमर्दिनी त्रिशूलशूलधारिणी
मनोव्यथा विदारिणी शिवंतनोतु पार्वती ।।1 ।।
भुजंगतल्पशायिनी महोग्रकान्तभामिनी
प्रकाशपुंजदामिनी विचित्रचित्रकारिणी
प्रचण्डशत्रुधर्षिणी दयाप्रवाहवर्षिणी
सदा सुभाग्यदायिनी शिवं तनोतु पार्वती ।।2।।
प्रकृष्टसृष्टिकारिका प्रचण्डनृत्यनर्तिका
पिनाकपाणिधारिका गिरीशश्रृंगमालिका
समस्तभक्तपालिका पीयूषपूर्णवर्षिका
कुभाग्यरेखमार्जिका शिवं तनोतु पार्वती ।।3।।
तपश्चरीकुमारिका जगत्पराप्रहेलिका
विशुद्धभावसाधिका सुधासरित्प्रवाहिका
प्रयत्नपक्षपोषिका सदार्थिभावतोषिका
शनिग्रहादितर्जिका शिवं तनोतु पार्वती ।।4।।
शुभंकरी शिवंकरी विभाकरी निशाचरी
नभश्चरी धराचरी समस्तश्रृष्टिसंचरी
तमोहरी मनोहरी मृगांकमौलिसुन्दरी
सदोग्रतापसंचरी शिवं तनोतु पार्वती ।।5।।
पार्वतीपंचकं नित्यमधीते यत् कुमारिकादुष्कृतं निखिलं हत्वा वरं प्राप्नोति सुन्दरम् ।।
।। इति श्रीपार्वतीपंचकस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।

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