श्रीमत्स्वामिदयानन्दसरस्वती निर्मित: संस्कृतवाक्यप्रबोध:।

श्रीमत्स्वामिदयानन्दसरस्वती   निर्मित:
                                 संस्कृतवाक्यप्रबोध:।
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94) अतिस्वल्पे भुक्ते शरीरबलं ह्रसत्यिधके चात: सर्वदा मिताहारी भवेत।
बहुत कम और अत्यधिक भोजन करने से शरीर का बल घटता है, इससे सब मिताऽऽहारी होवे।
Overeating as also undertaking results into the weakening of the body. So one should always be moderate in eating(=abstemious).

95)योऽन्यथाऽऽहारव्यवहारौ करोति स कथं न दुःखी न जायेत्?
जो उलट-पलट आहार और व्यवहार करता है वह क्यों न दुःखी होवे?
Why should he who violates this dictum for eats and drinks and principles of conduct not suffer?( run into trouble)?

96)येन शरीराच्छ्रमो न क्रियते स शरीरसुखं नाप्नोति।
जो शरीर से परिश्रम नहीं करता वह शरीर के सुख को प्राप्त नहीं होता।
One who does not do physical labour does not acquire physical happiness(=comfort).

97)येनात्मना पुरुषार्थो न विधीयते तस्यात्मनाो बलमपि न जायते।
जो आत्मा से पुरुषार्थ नहीं करता उसका आत्मा का बल भी नहीं बढता. 
One who does not do spiritual labour does not become spiritually strong.

98)तस्मात्सर्वैर्मनुष्यैर्यथाशक्ति सत्क्रिया नित्यं साधनीयाः।
इससे सब मनुष्यों को उचित है यथाशक्ति उत्तम कर्मों की साधना नित्य करनी चाहियें।
So all men must do their best in doing good deeds every day.

99)भो देवदत्त! मैं तुमको भोजन के लिए निमन्त्रित करता हूँ।
Devadatta! I invite you (to meal)

100)मन्येऽहं कदा खल्वागच्छेम्?
मै मानता हूँ परन्तु किस समय आऊँ?
I accept the invitation. When shall (=should) I come?

101) श्वो द्वितीयप्रहरमध्ये आगन्तासि।
कल डेढ पहर दिन चढे आना।
Come tomorrow at 10:30 a.m.(= at the time when one and a half prahar are past.)

102)आगच्छ भो, आसनमध्यास्व, भवता ममोपरि महती कृपा कृता।
  आप आइयें, आसन पर बैठिए, आपने मुझ पर बड़ी कृपा की।
Come on. Take (this) seat. You have been very kind to me.

धन्यवाद !
ऋषिदेव:
       
 
  

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