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प्रत्‍याSभ्‍यां श्रुव: .... चतुर्थी विभक्ति: ।

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सूत्रम् -प्रत्‍याSभ्‍यां श्रुव: पूर्वस्‍य कर्ता

वृत्ति: - आभ्‍यां परस्‍य श्रृणोतेर्योगे पूर्वस्‍य प्रवर्तनरूपव्‍यापारस्‍य कर्ता सम्‍प्रदानं स्‍यात्
श्रु-धातुपूर्वं यदा प्रति, आड्. वा उपसर्गौ योजितौ स्‍याताम् चेत् संकल्‍पे संकल्‍पप्रेरकस्‍य  सम्‍प्रदानसंज्ञा स्‍यात् ।

हिन्‍दी - श्रु धातु के पहले जब प्रति और आड्. उपसर्ग लगे हों और इसका अर्थ प्रतिज्ञा करना हो तो जो प्रतिज्ञा करने या वादा करने की प्रेरणा देने वाला हो उसकी सम्‍प्रदान संज्ञा होती है ।

उदाहरणम् -
विप्राय गां प्रतिश्रृणोति आश्रृणोति वा ।
ब्राह्मण को गाय देने का संकल्‍प करता है ।


इति

ऑनलाइन-संस्‍कृत-हिन्‍दी-अंग्रेजी-शब्‍दकोश में शब्‍द कैसे ढूंढें ।

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संस्‍कृतजगत् संस्‍कृत-हिन्‍दी-अंग्रेजी-आनलाइन-शब्‍दकोश में शब्‍दों को ढूढने के लिये निम्‍न तरीके प्रयोग किये जा सकते हैं ।

हिन्‍दी शब्‍द खोज
यदि आपको हिन्‍दी का कोई शब्‍द ढूढना है तो खोजमंजूषा में उस शब्‍द को हिन्‍दी में डालें । और सर्च बटन पर क्लिक करें । यदि शब्‍द न मिले तो उस शब्‍द का आधा खोजमंजूषा में डालकर पुन: खोजें ।

यदि हिन्‍दी में सीधे टाइप कर सकने में अक्षम हैं तो हिन्‍दी के शब्‍द रोमन लिपि में टाइप करके ढूँढें ।
जैसे - माना कि आप को 'हृदय' शब्‍द ढूढना है । तो सर्वप्रथम आप 'हृदय' ढूंढें । यदि न मिले तो हृद ढूंढें । और यदि हिन्‍दी टाइप कर सकने में अक्षम हैं तो hridaya टाइप करके ढूंढें ।

संस्‍कृत शब्‍दान्‍वेषण 
यदि संस्‍कृत में शब्‍द खोजना है तो शब्‍द के शुरुआती अक्षर अथवा पूरा शब्‍द खोजमंजूषा में डालें तथा खोज बटन पर क्लिक करें ।

अंग्रेजी शब्‍द खोज 
यदि शब्‍दों को अंग्रेजी में खोजना है तो सामान्‍यतया उसकी वर्तनी (स्‍पेलिंग) खोजमंजूषा में डालें । यदि वर्तनी याद न हो तो शब्‍द की सम्‍भावित वर्तनी का प्रारम्‍भ डालकर खोजें ।
जैसे - यदि हमें sky शब्‍द खोजना है किन्‍तु…

क्रुधद्रुहोरुप..... चतुर्थी विभक्ति: ।

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सूत्रम् - क्रुधद्रुहोरुपसृष्‍टयो: कर्म ।।

उपसर्गयुक्‍ताभ्‍यां क्रुध्, द्रुह् धातुभ्‍यां योगे यस्‍योपरि क्रोध: क्रियते तस्‍य कर्मसंज्ञा भवेत् न तु सम्‍प्रदानसंज्ञा ।

हिन्‍दी -क्रुध् व द्रुह् धातुओं के साथ उपसर्ग लगे होने पर इन धातुओं की सम्‍प्रदानसंज्ञा न होकर कर्म संज्ञा होती है ।

उदाहरणम्
क्रूरम् अभिक्रुध्‍यति अभिद्रुह्यति वा
क्रूर पर क्रोध करता है, अथवा द्रोह करता है ।


इति

क्रुधद्रुहेर्ष्‍या..... - चतुर्थी विभक्ति: ।

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सूत्रम् - क्रुधद्रुहेर्ष्‍यासूयार्थानां यं प्रति कोप: ।।

क्रुध् (क्रोध करना), द्रुह् (द्रोह करना), ईर्ष्‍य् (ईर्ष्‍या करना), असूय (गुणों में दोष निकालना) धातुषु, एतेषां समानार्थिशब्‍दानां च योगे यस्‍योपरि क्रोधादय: कृयते तस्मिन् सम्‍प्रदानसंज्ञा भवति । तत्र च चतुर्थी विभक्ति: भवेत् ।

हिन्‍दी - क्रुध्, द्रुह्, ईर्ष्‍य् व असूया अर्थ वाली धातुओं धातुओं के योग में जिसपर क्रोध किया जाए उसकी सम्‍प्रदान संज्ञा होती है ।

उदाहरणम् - 
हरये क्रुध्‍यति द्रुह्यति ईर्ष्‍यति असूयति वा ।
हरि पर क्रोध करता है, हरि से द्रोह करता है, हरि से ईर्ष्‍या करता है, हरि से असूया करता है ।

खला: सज्‍जनेभ्‍य: असूयन्ति ।
दुष्‍ट लोग सज्‍जनों से असूया करते हैं ।

इति

संस्कृतजगत्-संस्कृत-हिंदी-आंग्ल-शब्दकोशस्य उद्घाटनम् ।।

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मित्राणि
सम्प्रति संस्कृतजगत्संस्कृत-हिंदी-आंग्ल-शब्दकोशः उद्घाटितः । इदानीं केवलं सहस्र-सहस्रद्वयं वा मिति शब्दा: एव सन्ति किन्तु प्रतिदिनं शताधिकशब्दानां योगः चलति ।
शब्दकोशस्य लाभं स्वीकर्तुम्
http://dictionary.sanskritjagat.com/
अथवा
http://sanskritjagat.in/dictionary
श्रृंखलां नोदयतु ।

इति

एकाक्षरशब्दकोशः ।।

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अ - विष्णु
ई - लक्ष्मी
उ - शिव
ऐ - शिव
क - ब्रह्म
ख - आकाश
ग - स्वर्ग
घ - घण्टा
च - पूर्ण चंद्रेश्वर
छ - निर्मल
ज - शिव
झ - वृहस्पति
ट - शब्द
ठ - महादेव
ड - महादेव
ढ - ध्वनि
त - रत्न
थ - पर्वत
द - दाता
ध - धनी
न - नहीं
भ - नक्षत्र, ग्रह, राशि, शुक्राचार्य
म - शिव, चन्द्र
य - वायु, यश
र - अग्नि
ल - इन्द्र
ह - कष्ट, शोक
ज्ञ - बुद्धि

इति