दिवस्‍तदर्थस्‍य - षष्‍ठी विभक्ति: ।।


सूत्रम् - दिवस्‍तदर्थस्‍य ।। 2/3/58 ।।

द्यूतम्, क्रयणं-विक्रयणम् इत्‍ययो: अर्थे दिव् धातो: कर्मणि षष्‍ठी विभक्ति: भवति ।

उदाहरणम् - 
शतस्‍य दीव्‍यति - सौ रूपये का दांव लगाता है / सौ रूपये का लेन-देन करता है । 

हिन्‍दी - 
द्यूत और क्रय-विक्रय करना अर्थ में दिव् धातु के कर्म में द्वितीया विभक्ति होती है ।।

इति

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