अद्यतनीयस्‍य कृते एतावत् एव अलमस्ति 

अग्रिम कक्ष्‍यायां भूतकाल विषये पठिष्‍याम: ।।

भवदीय:-आनन्‍द
 

3 टिप्पणियाँ

  1. पठामि संस्कृतं नित्यम, ददामि टिप्पणिम कदा.
    ध्यायामि संस्कृतं सम्यक, भयामि आनंदम गदा.

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  2. .

    पढ़ता हूँ संस्कृत को हमेशा,
    देता हूँ टिप्पणी कभी-कभी.
    स्वाध्याय करता हूँ संस्कृत का भली-भाँति,
    भय खाता हूँ आनंद के अनुशासन की गदा से.

    .

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  3. हा हा हा हा

    काव्‍य के माध्‍यम से खिंचाई भी बढियॉं करते हैं आप ।।
    धन्‍यवाद

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