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पाठ : (३९) कृदन्त (६) ल्यप् प्रत्यय ||

(सोपसर्ग = उपसर्ग सहित धातु हो तो क्त्वा प्रत्यय के स्थान पर ल्यप् प्रत…

पाठ : (३८) कृदन्त (५) क्त्वा प्रत्यय ||

(एक वाक्य में प्रयुक्त दो अथवा दो से ज्यादा क्रियाओं का कर्त्ता यदि समान…

पाठ: (37) कृदन्त (4) निष्ठा प्रत्यय

(क्त प्रत्यय भाव में। अकर्मक धातुओं से क्त प्रत्यय भाव में होता है। सकर्…

पाठ: (36) कृदन्त (3) निष्ठा प्रत्यय

(क्त प्रत्यय कर्तृवाच्य विशेषणरूप प्रयोग) बाला महाविद्यालयं गता = बालिक…

पाठ: (35) कृदन्त (2) निष्ठा प्रत्यय

(क्त प्रत्यय कर्त्तृवाच्य- अकर्मक धातुएं तथा श्लिष्, शीङ्, स्था, आस्, वस…

पाठ: (34) कृदन्त 1 (निष्ठा प्रत्यय)

(व्याकरण में क्त तथा क्तवतु प्रत्यय की निष्ठा संज्ञा है। सामान्य रूप से …

पाठ: (33) भाववाच्य

(क्रिया को प्रधानरूप से कहने के लिए भाववाच्य का प्रयोग होता है। भाववाच्य…

पाठ: (32) कर्मवाच्य (पॅसिव्ह वॉईस)

(कर्म को प्रधान रूप से कहने के लिए कर्मवाच्य का प्रयोग होता है। कर्मवाच्…

पाठ: (31) सप्तमी विभक्ति (4)

(निमित्त, हेतु, सम्प्रदान आदि के वाचक शब्दों में चतुर्थी के स्थान में सप…

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